एफ़डी (फ़िक्स्ड डिपोजिट) के बारे में तथ्य/फैक्ट्स | Facts about FD (Fixed Deposit) in Hindi

भारत में ज़्यादा तर लोगों के लिये निवेश का मतलब होता है एफ़डी (फ़िक्स्ड डिपोजिट) करवाना। ट्रिप के लिये पैसे सेव करने है एफ़डी करवा दो, बचो के लिये पैसे सेव करने है एफ़डी करवा दो, कुछ समझ नहीं आ रहा फिर भी एफ़डी करवा दो। काफ़ी कम लोगों को एफ़डी के बारे में सही जानकारी है और इसी लिये आज के इस लेख में मैं आपको बताऊँगा एफ़डी से जुड़े 5 ऐसे हैरान कर देने वाले तथ्य जो आपको पता होने चाहिये।

1. एफ़डी में पैसा निवेश कर दिया तो वह अब सुरक्षित हो गया

सबसे पहला लोगों के अंदर जो मिथ है वह यह है की एफ़डी में पैसा निवेश कर दिया मतलब वह एकदम सेफ़ हो गया। पर क्या होगा अगर आपने जिस बैंक में पैसा रखा हुआ है वह बैंक ही डूब जाये। अब आप लोग बोलोगे आरबीआई तो बैठा ही है इन सब के लिये, पर यह बात आधि सच है। आरबीआई आपकी पाँच लाख तक की डिपोजिट को इंश्योर करता है पर यह बात सारे बैंको के लिये नहीं है।

अब देखिये डिपोजिट के अंदर जो पैसा है वह आरबीआई की एक बॉडी DICGC से इन्श्योर्ड होता है। अब इसमें काफ़ी सारी बैंक्स कवर्ड है पर फिर भी कुछ गिनी चुनी बैंक्स है जो इसमें कवर्ड नहीं है। अब दुर्भाग्य से हमारे पास कोई लिस्ट नहीं है जिसमे कौन-कौन सी बैंक कवर्ड है यह हमे पता चल सके। यह सारी जानकारी आपको गूगल से मिल जायेगी आप ढूँढ सकते हो।

और ऊपर से काफ़ी लोगों को यह पता ही नहीं होता की यह जो DICGC का जो इंश्योरेंस है वह सिर्फ़ बैंक्स के लिये होता है NBFCs के लिये नहीं होता। फिर चाहे वह बड़ी NBFCs ही क्यों ना हो, जैसे की बजाज फ़िंसर्व या फिर टाटा कैपिटल।

2. इमरजेंसी का पैसा निकाल सकते है

अब दूसरा तथ्य ऐसा है की हमे लगता है की हमारा जो पैसा एफ़डी में निवेश किया हुआ है अगर उसकी इमरजेंसी में ज़रूरत पड़ती है तो आप उस एफ़डी को तोड़के उस पैसे को निकाल सकते हो। क्योंकि आप सब लोगों को पता हो होगा, एफ़डी को आप समय से पहले तोड़ लेते हो तो आपको पैनल्टी लगती है। और उसके अलावा जो ब्याज उन्होंने ने बताया होता है उससे कम आपको ब्याज मिलता है।

इससे आपका काफ़ी नुक़सान होता है। पर एफ़डी तोड़ने से अच्छा आप एक ओवरड्राफ्ट फ़ैसिलिटी ले सकते हो अपनी एफ़डी के ख़िलाफ़। ये ओवरड्राफ्ट फ़ैसिलिटी होती क्या है? और आपको एफ़डी के ख़िलाफ़ ओवरड्राफ्ट फ़ैसिलिटी लेना क्यों अच्छा है आपकी एफ़डी के तोड़ने से चलिये देखते है।

ओवरड्राफ्ट फ़ैकल्टी जो है वो एक बैंक के लोन की तरह ही काम करता है। आप की एफ़डी के 80-90% अमाउंट की आपको एक क्रेडिट लाइन दी जाती है और जब भी आपको पैसे की ज़रूरत पड़ती है तब आप वह पैसे निकाल सकते हो और जब नहीं चाहिये तब वापस डाल सकते हो।

ओवरड्राफ्ट फ़ैसिलिटी की सबसे अच्छी यह है की आप जीतने दिन के लिये पैसे इस्तेमाल करोगे उतने दिन का ही आपका व्याज लगेगा। अब मान लीजिये एक महीने में आप को 20 दिन की पैसों की ज़रूरत पड़ती है और 21 वे दिन आप जाकर वापस से पैसे भर देते हो। तो उस 20 दिन तक जितना व्याज होगा उतना ही आपको व्याज लगेगा और ओवरड्राफ्ट फ़ैसिलिटी में आपको काफ़ी ज़्यादा फ़्लेक्सिबिलिटी मिल जाती है जो आपको पर्सनल लोन में नहीं मिलती। प्लस आप ये ओवरड्राफ्ट फ़ैसिलिटी एफ़डी के अगेंस्ट लेते हो तो आपको 1-2% व्याज दर पे ही मिल जाता है।

ओवरड्राफ्ट फ़ैसिलिटी तक इंटरेस्ट मतलब फ़िक्स्ड डिपोजिट प्लस 1-2%, मतलब अगर आपको एफ़डी से 6% का इंटरेस्ट आ रहा है, तो 6% + 1-2% मतलब आपको ओवरड्राफ्ट फ़ैसिलिटी में 7-8% का व्याज ही देना पड़ेगा।

3. कम व्याज दर मतलब कम रिस्क

सच बताना आपको भी ऐसा ही लगता है ना अगर कोई बैंक आपको कम व्याज दर पर दे रहा है, इसका मतलब आपको लगता है वह ज़्यादा सेफ़ है और आपको उसी को चुनना चाहिये। काफ़ी सारे ऐसे छोटे फ़ाइनैन्स बैंक्स है जो आपको ट्रेडिशनल बैंक्स से 1-2% ज़्यादा व्याज दर देते है। फिर भी हम उस में पैसे नहीं रखना चाहते क्यों की हमे लगता है की यह बहुत रिस्की है।

हमने लेख के शुरुआत में आपको बताया था कोई बैंक अगर DICGC के अंडर इन्श्योर्ड है तो वह आपके 5 लाख तक के डिपोजिट को एक दम सुरक्षित रख सकते है इसकी गारंटी तो आरबीआई लेता है। अपने पैसों को ऐसे बैंक में रखना जहापर लोव रैट मिल रहा है उससे अच्छा आप अपने पैसों को ऐसी जगह रख सकते हो जहाँ पर आपको हायर रिटर्न मिल रहा है और वह बैंक भी कवर्ड है DICGC से।

अब कुछ लोग सोच रहे होंगे की हमारा पैसा अगर पाँच लाख से ज़्यादा है तब क्या करे, तो आप अपने पैसे की इन्वेस्टमेंट अगर बीस लाख रुपये है तो आप उन्हें पाँच-पाँच लाख में बाँटकर अलग अलग अलग बैंक्स में रख सकते हो जहापर आपको इंटरेस्ट रैट भी अच्छा मिल रहा है और वह बैंक कवर्ड भी है DICGC के अंडर।

4. NBFCs और नॉनबैंक फ़ाइनेंशियल कम्पनीज़ में एफ़डी करवाना काफ़ी रिस्की होता है?

अब NBFCs को DICGC कवर नहीं करता है लेकिन फिर भी कुछ ऐसी NBFCs है जो काफ़ी सारे बैंको से भी ज़्यादा सेफ़ है। चलिये मैं आपको एक एक्सैंपल से समझाता हूँ बजाज फ़िंसर्व के जो एफ़डीज् है उसको ट्रिपल ए AAA रेटिंग दी गई है कृशील CRISIL से। अब कृशील जो है कॉर्पोरेट्स के लिये CIBIL सिबिल की तरह काम करता है। जैसे CIBIL इंडीविडुअल्स के लिये है और CRISIL कॉर्पोरेट्स के लिये है।

मतलब इंशोर्ट अगर बताई तो CRISIL रेटिंग एजेंसी है सारे कॉर्पोरेट्स के लिये और AAA मतलब बहुत ज़्यादा सुरक्षित यानी की जो बजाज फ़िंसर्व की एफ़डी है वह बहुत ज़्यादा सुरक्षित है। और यस बैंक की जो एफ़डी है उसको -A रेटिंग दी गई है यानी की AAA से सात स्टेप्स नीचे फिर भी लोग यस बैंक में एफ़डी करवाना पसंद करते है बजाज फ़िंसर्व से करवाने के बजे क्योंकि वह एक बैंक है।

पर किसी भी NBFC में अगर आप एफ़डी करवा रहे हो तो इस बात का ज़रूर ध्यान रखना की अगर आप उस एफ़डी को समय से पहले तोड़ देते हो तो वहा पर आपको पैनल्टी थोड़ी ज़्यादा देनी पड़ सकती है बैंक्स के मुक़ाबले।

5. अगर आपने अपना PAN कार्ड बैंक में सबमिट किया है तो 10% TDS कटेगा और अगर नहीं किया तो 20% TDS कटेगा

अगर आप इस से ज़्यादा यानी की 10% या 20% से ज़्यादा टैक्स भरते हो तो आप इस को अलग से भर सकते हो। और अगर आपका इससे कम टैक्स बनता है तो आप इसको वापस से क्लेम कर सकते हो।

पर क्या होगा अगर आपको पता ही है पहले से ही की आपका जो टोटल टैक्सेबल है वह ढाई लाख से अंदर बनने वाला है एफ़डी का इनकम जोड़ के। तो उस केस में आप को ज़ीरो टैक्स भरना पड़ेगा।

तो ऐसे केस में आप अपने बैंक में 15G या फिर 15H फ़ॉर्म सबमिट कर सकते हो, आपका बैंक आपके इंटरेस्ट से कोई भी TDS नहीं काटेगा। कॉमेंट्स में ज़रूर बताना इनमें से कौन सा फैक्ट है जो आपको नहीं पता था।